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आजमगढ़ पुलिस का उत्कृष्ट कार्य 4 वर्ष पूर्व बुजुर्ग अस्थिरचित्त लापता महिला को तमिलनाडु उसके परिजनों तक पहुँचाया

 


आजमगढ़ : लगभग लगभग 11 माह पूर्व फरवरी-2020 के प्रथम सप्ताह में सुभाष चन्द्र दुबे, पुलिस उपमहानिरीक्षक, आजमगढ़ परिक्षेत्र, आजमगढ़ को अपने आवास से बाहर जाने वाली सड़क पर एक अर्द्धविक्षिप्त, मानसिक रुप से अस्थिर बुजुर्ग महिला, जिसकी उम्र लगभग 60 वर्ष थी, रोड के किनारे कूड़ा-करकट के ढ़ेर पर बैठी मिली, जिनसे संवाद करने का प्रयास करने पर उनकी भाषा दक्षिण भारत की प्रतीत हो रही थी, जिसके कारण उनकी भाषा समझ में नहीं आ रही थी। उक्त महिला के बारे में और डिटेल से पता करने पर कार्यालय के स्टाफ और अन्य दुकानदारों द्वारा यह बताया गया कि उक्त महिला लगभग 03-04 वर्ष से आजमगढ़ में सड़क पर स्थान बदल-बदल कर रह रही है और मानसिक रुप से अस्थिर होने के कारण इधर-उधर लगातार घूमती रहती है।



  पुलिस उप महानिरीक्षक, आजमगढ़ परिक्षेत्र द्वारा उक्त महिला के बारे में स्थानीय कोतवाली व स्थानीय महिला थाना  से सम्पर्क कर उसके लिए समुचित प्रबन्ध कराने का निर्देश दिया गया, जिस कड़ी में स्थानीय पुलिस द्वारा उक्त महिला को एन0जी0ओ0 के माध्यम से आश्रय स्थल में रखवाया गया, किन्तु उक्त महिला पुनः वहाँ से निकलकर रोड पर चली गयी। ये स्थिति बारम्बार होती रही। इसी कड़ी में पुनः सड़क पर उक्त महिला को देखकर पुलिस उप महानिरीक्षक, आजमगढ़ परिक्षेत्र द्वारा स्थानीय पुलिस को उक्त महिला के लिए वैकल्पिक रुप से आवास, भोजन एवं वस्त्र आदि का प्रबन्ध करने के साथ ही सोशल मीडिया सहित अन्य संचार माध्यमों से भी उक्त महिला के मूल निवास स्थान का भी पता करने का प्रयास किया गया किन्तु सफलता नहीं मिली। इस दौरान उक्त महिला स्थानीय कोतवाली परिसर में बने हुए महिला आवास, जिसमें महिला सिपाही भी रहती हैं, महिला सिपाही के साथ पुलिस उप महानिरीक्षक, आजमगढ़ परिक्षेत्र के निर्देश पर रखवा दी गयी,  ताकि उसके भोजन, वस्त्र आदि का समय से समुचित प्रबन्ध हो सके।


 इस कड़ी में पुलिस द्वारा लगातार अथक प्रयास करके एक चिकित्सक जो दक्षिण की तमिल भाषा के जानकार थे, से उक्त महिला का संवाद कराया गया तो उन्होंने उक्त महिला की भाषा तमिल बतायी। इस कड़ी में बारम्बार उक्त चिकित्सक से महिला का लगातार संवाद कराया जाता रहा, किन्तु उसके बारे में कोई अग्रिम सफलता नहीं मिल सकी। नाम पता के बारे में उक्त महिला को कागज कलम देने पर उसके द्वारा 02-03 मोबाइल नम्बर कागज पर लिखे गये, जिनमें से एक नम्बर पर सम्पर्क करने पर उक्त नम्बर संतोष कुमार, निवासी कोयम्बटूर, तमिलनाडु का ज्ञात हुआ, जिस नम्बर पर उक्त महिला से बात करायी गयी तो संतोष कुमार उस महिला को अपनी सास बताया। फिर पुलिस द्वारा उक्त संतोष कुमार को उक्त महिला से वीडियो कालिंग करके पहचान करायी गयी और संतोष कुमार के आजमगढ़ आने की व्यवस्था पुलिस द्वारा करायी गयी। संतोष कुमार दिनांक 31.12.2020 को आजमगढ़ कोतवाली आये, जहाँ पर पुलिस उप महानिरीक्षक, आजमगढ़ परिक्षेत्र, क्षेत्राधिकारी नगर और प्रभारी निरीक्षक, कोतवाली की उपस्थिति में अपनी सास की पहचान की।


 उक्त महिला का नाम पता उसके दामाद संतोष कुमार द्वारा श्रीमती नागलक्ष्मी पत्नी स्व0 सेनवग मूर्ति, निवासी नरीनपुरम, थाना एलनदुरई, जिला कोयम्बटूर, तमिलनाडु बताया गया। उक्त श्रीमती नागलक्ष्मी के परिवार में 02 पुत्रियां मंगला चेलवी व सत्यप्रिया हैं। उनके कोई लड़का नहीं है। उक्त नागलक्ष्मी के पति का देहान्त वर्ष 2016 में हो गया था, जिसके बाद नागलक्ष्मी की मानसिक स्थिति सही नहीं रही और वर्ष 2017 की गर्मियों में वह अपने घर से लापता हो गयी। उनके दामाद संतोष कुमार, जो वहाँ पर लेबर का कार्य करते हैं, के द्वारा अपने आस-पास के परिवेश में उक्त महिला को खोजने का भरसक प्रयास किया गया किन्तु उन्हें सफलता नहीं मिली थी। उक्त कड़ी में उक्त महिला लगभग पिछले 04 वर्षों से आजमगढ़ शहर के भिन्न-भिन्न स्थानों में अर्द्धविक्षिप्त स्थिति में रहकर भाषा एवं क्षेत्र से अंजान होने के कारण खुले आसमान के नीचे यत्र-तत्र विचरण एवं प्रवास कर रही थी। उक्त महिला के दामाद द्वारा पुलिस के इस मानवीय संवेदनाजनित व्यवहार पर अत्यन्त भावुक प्रतिक्रिया दी गयी। पुलिस उप महानिरीक्षक, आजमगढ़ परिक्षेत्र सहित जनपद आजमगढ़ की पूरी पुलिस टीम को उक्त महिला के परिजनों से उसे मिलाकर अत्यन्त संतोष व प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है। 

उक्त महिला नागलक्ष्मी को आज दिनांक 01.01.2021 को जनपद गोरखपुर से कोयम्बटूर को जाने वाली ट्रेन से उसके दामाद के साथ टिकट कराकर उसे भोजन एवं वस्त्र इत्यादि आवश्यक संसाधन मुहैया कराकर आजमगढ़ पुलिस द्वारा जनपद गोरखपुर के रेलवे स्टेशन से उसके गन्तव्य स्थल कोयम्बटूर के लिए रवाना करा दिया गया है।



डेस्क

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