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मां की कृपा से बदली योगेन्द्र की जिंदगी, जाने कैसे ठीक हुई पैरालाइसिस की बीमारी

 



बलिया:  इसे आस्था के साथ-साथ मां की कृपा तो शायद अतिशयोक्ति होगी क्योंकि जब चिकित्सा विज्ञान किसी मर्ज के उपचार में अपने हाथ खड़े कर कर देता है तो वहां लोगों को एकमात्र आसरा पकड़ी धाम स्थित काली मां का रह जाता है और मां भी उन्हें कभी निराश नहीं करती. आस्था के आये भक्तों की झोली को खुशियों से भर देती हैं. यही कारण आज भी मां के दर पर हाजिरी लगाने वालों का तांता लगा रहता है.



 यहां हम आपको  बलिया जनपद के दुबहड़ थाना क्षेत्र के ब्यासी गांव निवासी योगेन्द्र पासवान की कहानी बताने जा रहा है,  जो रिक्शा चलाकर जैसे तैसे अपने परिवार का भरण पोषण करता था, लेकिन करीब 3 वर्ष पूर्व हुए पैरालासिस के अटैक ने उसकी जिंदगी को नर्क बना दिया. बीमारी के कारण उसके हाथ, पैर के साथ-साथ आंखें भी साथ छोड़ने लगी, जिससे उसके परिवार के सामने भुखमरी से हालात पैदा हो गए.  हालांकि परिजनों ने जैसे-तैसे धन की व्यवस्था करके उसको बलिया, बीएचयू के अलावा कई नामचीन डॉक्टरों से उपचार कराया,  लेकिन कहीं कोई फायदा नहीं हुआ. हालात इतने बदतर हो गए कि वह सैया पर पड़े पड़े  अपनी जिंदगी के दिन की नहीं लगा.


 तभी उसे पकड़ी धाम काली मंदिर की याद आई, जहाँ माँ काली के अनन्य उपासक और मंदिर के पुजारी रामबदन भगत अक्सर भक्तों से कहते हैं कि जब डॉक्टर हाथ खड़े कर दें, तब वो मां के दरबार में आए और पूरी आस्था के साथ अपनी व्यथा बताएं, मां उनकी पीड़ा जरूर दूर करेगी. योगेन्द्र अपनी माँ के साथ माँ काली के दरबार में पहुँचा और हाजिरी लगाने के साथ ही अपनी अर्जी मां के दरबार में रखी. साथ ही मां के अनन्य भक्त और मंदिर के पुजारी रामबदन भगत से अपनी व्यथा सुनाई. भगत ने मां का प्रसाद  के साथ कुछ जड़ी बूटियों को दिया और उनके नियमित सेवन की सलाह दी. यह मां का आशीर्वाद ही था कि प्रसाद के साथ जड़ी बूटियों के सेवन से योगेंद्र की बीमारी  न सिर्फ ठीक हुई बल्कि वह चलने फिरने लगा और उसकी आंखों से दिखाई भी देने लगा. वर्ष 2020 के अगस्त महीने में वह स्वयं अपने पैरों से चलकर मां के दरबार में आया और अपने ठीक होने पर की बात सबको बताई. 







डेस्क


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