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उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर टूटने से हुई भारी तबाही का जानें अपडेट

 





देहरादून: उत्तराखंड के चमोली जिले के जोशीमठ में रविवार को नंदादेवी ग्लेशियर टूटने से धौली गंगा नदी में विकराल बाढ़ आई। जिसमें बड़े पैमाने में तबाही हुई। ग्लेशियर फटने से ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट को भारी नुकसान पहुंचा है। इस हादसे में अबतक 10 लोगों के मौत की खबर है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के एक प्रवक्ता ने कहा, ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 150 से अधिक मजदूरों की मौत की आशंका है। उन्होंने बताया कि 8 शव बरामद किए गए हैं। वहीं राज्य आपदा प्रबंधन केंद्र के मुताबिक 170 लोगों के फंसने की आशंका है। वहीं 16 लोगों को एक सुरंग से बचाया भी गया है।

उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने कहा है कि राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम की 900 मीटर लंबी तपोवन सुरंग में बचाव कार्य को जल स्तर में वृद्धि के कारण रोकना पड़ा है। हालांकि रात में थोड़ी देर रुकने के बाद सोमवार सुबह आईटीबीपी, भारतीय सेना, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें काम में लग गई हैं।

आईटीबीपी ने कहा, सुरंग नं-1 से हमने 12 मजदूरों को बाहर निकाला है। हालांकि बाद में सुरंग से बाहर निकलने वालों की संख्या बढ़कर 16 हो गई। लेकिन अभी भी तपोवन के हाइड्रोपावर प्रॉजेक्ट की सुरंग नं-2 में 30 से 35 मजदूर फंसे हुए हैं। उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने स्थिति को नियंत्रण में बताते हुए कहा कि बिजली परियोजना पूरी तरह से बह गई है।

बचाव कार्य के लिए भारतीय वायुसेना की टीम को एयरलिफ्ट कर लाया गया है। जौलीग्रांट हवाईअड्डे के डायरेक्टर डीके गौतम ने मीडिया को जानकारी दी है कि भारतीय वायुसेना के C-130 जे सुपर हरक्यूलिस के दो भारी परिवहन विमान और दो अन्य विमान रविवार रात यहां पहुंचे हैं। इसके अलावा एमआई-17 के तीन और एक एएलएच हेलिकॉप्टर भी लाया गया है।

भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्टर ने प्रभावित इलाकों की रेकी की है। जिसमें उन्होंने पाया कि तपोवन डैम पूरी तरह से बह गया है। इसके अलावा मलारी वैली के एंट्रेस में दो ब्रिज भी बह गए। हालांकि जोशीमठ और तपोवन के बीच मुख्य सड़क ठीक है।

राहत और बचाव कार्य में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF), भारतीय सेना जुटी हुई है।

डेस्क

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