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टीबी रोगी खोजें, 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि पाएं : जिला क्षय रोग अधिकारी

 


- गैर सरकारी व्यक्ति द्वारा भी टीबी रोगी खोजने पर 500 रुपये दिए जाने का है प्रावधान 

- संचारी रोग अभियान एवं दस्तक अभियान के दौरान भी खोजे जाएंगे टीबी मरीज

बलिया। वर्ष 2025 तक देश को क्षय रोग उन्मूलन को लेकर प्रधानमंत्री के संकल्प को पूरा करने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। इसी क्रम में समुदाय की भागीदारी को और बढ़ाते हुए यह व्यवस्था की गयी है कि नया टीबी रोगी खोजने वालों को 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि उनके खाते में दी जाएगी। यह जानकारी जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ० आनन्द कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि जुलाई में विशेष संचारी रोग नियंत्रण माह एवं दस्तक अभियान के दौरान जो आशा कार्यकर्ता नए टीबी रोगी खोजेंगी उन्हें सूचनादाता के तौर पर 500 रुपये उनके खाते में दिये जाएंगे। अगर कोई गैर सरकारी व्यक्ति भी टीबी का नया रोगी खोजता है तो उसे सूचनादाता के तौर पर यही धनराशि देने का प्रावधान है।

डॉ आनंद ने बताया कि एक जुलाई से 31 जुलाई तक के विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान एवं 12 जुलाई से 25 जुलाई तक दस्तक अभियान के दौरान क्षय रोगियों को खोजा जाएगा । आशा कार्यकर्ता लक्षण वाले संभावित क्षय रोगियों को ढूंढेंगी। ऐसे रोगियों की लिस्ट तैयार कर वह एएनएम को देंगी और ब्लॉक मुख्यालय को भी उपलब्ध कराएंगी। ऐसे संभावित रोगियों की टीबी जांच कराई जाएगी। जांच में अगर टीबी की पुष्टि ऐसे रोगी में होती है जिसको पहली बार यह बीमारी हुई है और जो पहले से निक्षय पोर्टल पर दर्ज नहीं है तो रोगी को तुरंत पोर्टल पर पंजीकृत किया जाएगा। ऐसे रोगी को इलाज के दौरान 500 रुपये प्रति माह की दर से पोषण के लिए खाते में दिये जाएंगे। इसके अलावा जिसकी सूचना के कारण रोगी की पहचान हुई है उसे भी 500 रुपये खाते में दिये जाएंगे। 

डॉ० आनन्द कुमार ने बताया कि अभियान के दौरान यह दिशा-निर्देश भी दिये गए है कि सांस के गंभीर रोगी (एसएआरआई) और निमोनिया के साथ खांसी के मरीज (आईएलआई) मिलते हैं तो उनकी लिस्ट तैयार करके कोविड जांच के साथ-साथ टीबी की जांच अवश्य करवाई जाए। जिला क्षय रोग अधिकारी ने जनपदवासियों से अपील की है कि अभियान के दौरान जब अंग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ता उनके घर टीबी के लक्षणों के बारे में जानकारी मांगें तो सही जानकारी दें। बीमारी को छिपाएं नहीं। टीबी रोगियों के इलाज में गोपनीयता बरती जाती है। लक्षणों के बावजूद अगर कोई बीमारी को छिपा रहा है तो इससे उसके परिवार में भी टीबी के प्रसार का खतरा रहता है। बीमारी छिपाने वालों का समय से इलाज शुरू नहीं हो पाता और टीबी खतरनाक रूप अख्तियार करने लगती है।

डीटीओ ने बताया कि दो सप्ताह या अधिक समय तक खांसी आना, खांसी के साथ बलगम आना, बलगम में कभी-कभी खून आना, सीने में दर्द होना, शाम को हल्का बुखार आना, वजन कम होना और भूख न लगना टीबी के सामान्य लक्षण हैं। ऐसे में अगर खांसी का मरीज आता है तो उसके सभी लक्षणों की गहनता से पड़ताल होनी चाहिए और संभावित टीबी मरीज दिखे तो टीबी जांच अवश्य करवाई जानी चाहिए। 

इन परिस्थितियों में भी टीबी जांच आवश्यक:-

ड़ॉ आनंद कुमार ने बताया कि अगर कोई कोविड मरीज ठीक हो जाता है और उसकी जांच रिपोर्ट निगेटिव आ जाती है, फिर भी खांसी नहीं रूक रही है तो उसकी टीबी जांच अवश्य कराई जानी चाहिए। कोविड के लक्षण वाले व्यक्ति की जांच कराने पर अगर रिपोर्ट निगेटिव है तब भी टीबी जांच अवश्य करवा लें। टीबी की ट्रूनाट विधि से जांच की सुविधा जिला क्षय रोग केंद्र के अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सीयर मे भी उपलब्ध है ।


रिपोर्ट : धीरज सिंह

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