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पुजारी ने दिया प्रसाद और ठीक हो गया गले का कैंसर

 



बलिया:  गले के कैंसर मर्ज से ग्रसित एक युवक और की जिंदगी पकड़ी धाम स्थित माँ काली के दरबार में हाजिरी लगाने मात्र से आबाद हो गई. हालांकि डाक्टरों ने उसके इलाज में असमर्थता जताई, जिससे वह निराश थे,लेकिन मां काली के प्रसाद और पुजारी रामबदन भगत द्वारा दिए गए जलकुंभी के फल के सेवन से गले में हुआ कैंसर का मर्ज जाता रहा.




अपनी व्यथा सुनाते हुए नितेश प्रसाद पुत्र राम कुमार प्रसाद के साथ आयी किसमतिया पत्नी सुरेश और आरती पत्नी नीतेश बताती हैं कि अचानक उसके गले में दर्द हुआ.शुरुआती दिनों में तो उन्होंने इसे हल्के में लिया और पहले इलाकाई फिर जिला अस्पताल के डॉक्टरों से उपचार कराया, लेकिन बीमारी ठीक होने की बजाए लगातार बढ़ती जा रही थी. इसके साथ साथ नितेश को क्षय रोग में भी अपनी जकड़ में ले लिया था जिससे उसकी जिंदगी अंधकार में हो चली थी.

इसके बाद  बीएचयू में उपचार कराया, जहाँ डॉक्टरों  ने  गले में कैंसर होने की बात कही.  इसी बीच किसी ने उन्हें  पकड़ी धाम की काली मां के मंदिर में जाने की नसीहत दी. फिर वो परिजनों के साथ  पकड़ी धाम स्थित काली मंदिर पहुंचे और मंदिर के पुजारी रामबदन भगत से अपनी व्यथा बताई.

मां काली के अनन्य उपासक रामबदन भगत ने पहले उन्हें मां का प्रसाद दिया और  फिर  कैंसर के उपचार के लिए जलकुंभी के 100 से 150 फलों को सिलबट्टे पर पीस कर पीने को कहा.  इसके बाद उसने करीब चार सप्ताह तक जलकुंभी का फल पीसकर पिया. परिणाम स्वरूप  वह जलकुंभी के फल के सेवन से न सिर्फ ठीक हो गया.



डेस्क

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