शिव-विवाह और भस्मासुर वध का किया भावपूर्ण वर्णन
गड़वार(बलिया) क्षेत्र के त्रिकालपुर गांव स्थित प्राचीन शिव मंदिर परिसर में चल रहे अभिषेकात्मक रूद्र महायज्ञ के सातवें दिन रविवार को कथावाचिक साध्वी साधना ने भगवान शिव से जुड़े कई महत्वपूर्ण पौराणिक प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया,जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा में उन्होंने सबसे पहले सती प्रसंग का उल्लेख किया गया। कथावाचिका ने बताया कि राजा दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान होने पर माता सती ने स्वयं को योगाग्नि में समर्पित कर दिया। इस प्रसंग को सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भावुक हो गए। कथावाचिका ने कहा कि यह प्रसंग त्याग, आत्मसम्मान और भक्ति की पराकाष्ठा को दर्शाता है। सती माता के देह त्याग के बाद भगवान शिव के विरह और उनके गहन योग में लीन होने की कथा का भी विस्तार से वर्णन किया गया। उन्होंने कहा कि यह प्रसंग जीवन में वैराग्य और आत्मसंयम का संदेश देता है। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की कथा सुनाई गई। कथावाचिका ने इसे शक्ति और शिव के मिलन का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह प्रसंग जीवन में संतुलन, प्रेम और ऊर्जा के महत्व को दर्शाता है। विवाह प्रसंग के दौरान श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर कथा का श्रवण करते रहे। कथा में भस्मासुर वध का प्रसंग भी सुनाया गया। कथा के अंत में आरती और प्रसाद वितरण किया गया, जिससे वातावरण पूर्ण रूप से भक्तिमय हो गया।
रिपोर्ट : डी. पाण्डेय


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