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फाइलेरिया की शुरुआती लक्षण पर इलाज मिल जाए तो हाथी पांव से बचा जा सकता है : डा० सुजेता

 




रतसर (बलिया) फाइलेरिया की शुरुआती लक्षण के दौरान अगर उसका इलाज हो जाए तो हाथी पांव या मोटे हाथ से बचा जा सकता है। उक्त बातें मंगलवार को स्थानीय सीएचसी के मिटिंग हाल में आयोजित फाइलेरिया से ग्रसित रोगियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान जनपद से आई फाइलेरिया टीम के रिजनल एनटीडी आफिसर डा० सुजेता ने कही। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया रोग से बचने के लिए दो वर्ष से उपर के सभी लोगों को इसकी दवा का सेवन करने की आवश्यकता है इससे फाइलेरिया रोग से बचा जा सकता है इसके लिए जनपद के सभी सीएचसी एवं पीएचसी पर दवा उपलब्ध करा दी गई है। चिकित्सा अधीक्षक डा० राकिफ अख्तर ने बताया कि सीएचसी पर सर्वे के दौरान चिन्हित किए गए क्षेत्र से आज 45 रोगियों को रोग से बचाव के लिए किट वितरित किया गया। जिसमें टैब,मग,तौलिया, सेवलान, ग्लब्स एवं अन्य दवा शामिल है। पाथ मानिटर वेद प्रकाश सिंह ने फाइलेरिया मरीजों को प्रशिक्षण के दौरान बताया कि हाथी पांव वाले रोगियों को प्रभावित अंग को अच्छी तरह से धोकर साफ़ करके रखना है ताकि इस पर किसी प्रकार का इंफेक्शन से जख्म न बन सके। इस मौके पर गोपाल जी पाण्डेय,अनिल कुमार, मिनहाज,ए.के.शर्मा,आशा संगिनी पूनम,बबीता,रीता सिंह सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहे।


रिपोर्ट : धनेश पाण्डेय

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