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पाश्चात् संस्कृति से आए पर्व युवा पीढ़ी को भ्रमित कर रहे है : मुनीश जी महाराज

 




रतसर (बलिया) राम का चरित्र अनुकरणीय है। जो कोई प्रभु श्रीराम के आदर्शों पर चलने का संकल्प ले ले, तो उसका जीवन धन्य हो जाता है। यह बात स्थानीय नगर पंचायत स्थित बीका भगत  पोखरा के मन्दिर परिसर में  आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा महायज्ञ के तीसरे दिन शनिवार को अयोध्या धाम से पधारे मुनीश जी महाराज ने कही। उन्होंने बताया कि जीवन की सार्थकता के लिए अध्यात्म व धर्म का अनुसरण बहुत जरूरी है। भगवान राम का चरित्र जहां एक ओर पारिवारिक रिश्तों की अहमियत को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर जाति-पाति के भेदभाव को मिटाकर मानव मात्र में सौहार्द की भावना जगाता है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने मिथिला पुरी का भ्रमण बड़ी शालीनता के साथ किया। राम और लक्ष्मण के आगमन की सूचना मिली तो लोग धाम और काम दोनो को ही छोड़कर अत्यन्त विह्वल होकर राम के दर्शन के लिए दौड़ पड़े। होली और दीवाली जैसे पर्व खुशियों के रंग और आध्यात्मिक प्रकाश की ऊर्जा को बढ़ाते है । वही पाश्चात् संस्कृति से आए पर्व हमारी युवा पीढ़ी को भ्रमित कर रहे है I मर्यादित जीवन के सूत्रों को रामकथा से ही सिखा जा सकता है। श्री रामकथा महायज्ञ मण्डप में विभिन्न धार्मिक  अनुष्ठान हुआ। जय श्री राम के उद्घोष से क्षेत्र गुंजायमान हो रहा है। यज्ञाचार्य संकल्प जी महाराज ने यजुर्वेद का पाठ किया वहीं आचार्य संतोष कृष्णम जी महाराज ने महारुद्र का जाप किया। दिन के दस बजे से यज्ञ मण्डप में स्थापित विभिन्न देवी- देवताओं के वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ विधि-विधान से पूजा- अर्चना की गई। श्रीराम और श्री हनुमंत प्रभु का स्मरण करते हुए सैकड़ों महिला-पुरुष और बुजुर्गों ने यज्ञ मंडप की परिक्रमा की । वहीं कई लोग 12 से 72 घंटे का संकल्प लेकर मंडप परिक्रमा कर रहे है ।

रिपोर्ट : धनेश पाण्डेय

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