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समस्याओं के मकड़जाल में है रेवती नगर क्षेत्रवासी


 

रेवती (बलिया ):नमक सत्याग्रह, साईमन कमीशन के विरोध , सन 1942 के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने के बाद भी नगर क्षेत्र का अपेक्षित विकास नही होने से क्षेत्रवासी आज भी समस्याओं के मकड़जाल में उलझे हुए है। 

3.20 करोड़ की लागत से निर्मित 30 बेड का सीएचसी हास्पिटल विशेषज्ञ चिकित्सकों तथा चिकित्सा उपकरणों के अभाव में इसका समुचित लाभ क्षेत्रवासियों को नही मिल पा रहा है ।  रेवती हडियाकला, रेवती -कुसौरीकला, गायघाट-अघैला ,  रेलवे स्टेशन जाने वाले आदि सम्पर्क मार्गो की खस्ताहाल के चलते क्षेत्र का विकास अवरूद्ध है। साधन न चलने के कारण लोग पैदल आते जाते है। जिससे यहां का  व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा है । रेवती नगर में पावर हाउस से दह होकर बाईपास की सुविधा न होने से बाजार में कमोवेश प्रति दिन जाम की स्थिति लगी रहती है। आजादी के इतने दशक बाद भी रेवती नगर रोडवेज की परिवहन सेवा से वंचित है । बीते एक वर्ष से हाल्ट घोषित रेवती को स्टेशन का दर्जा बरकरार न होने से यहां यात्री सुविधाओं के विस्तार का कार्य ठप्प है। इसके लिए क्षेत्रवासियो द्वारा अनेकानेक धरना-प्रदर्शन के साथ ज्ञापन सौंपा गया । किन्तु रेल प्रशासन चुप्पी साधे हुए है । टीएस बंधा से सटे सरयू नदी के तटवर्ती एक दर्जन से अधिक ग्राम सभाओं के लोग बाढ़, जलप्लावन, आग लगी जैसी प्राकृतिक आपदा के शिकार होते है इसके रोकथाम के लिए कुछ प्रयास नही हो पाया है। अब लोगो की एकटक आंस निषाद भाजपा गठबंधन की अपनी नव निर्वाचित विधायक भाजपा नेत्री केतकी सिंह की तरफ लगी है ।


रिपोर्ट -पुनीत केशरी

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