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प्रशासन की नाकामी का उजागर करना पत्रकारों के लिए बड़ी चुनौती


 



(बलिया) जिला प्रशासन द्वारा एक वरिष्ठ पत्रकार को उसके दफ्तर से एक अपराधी की तरह उठाकर ले जाना और अपराधी की तरह व्यवहार करना एक अपराध से कम नहीं। प्रदेश में आए दिन किसी न किसी पत्रकार के साथ इस तरह के घटना घट रही है।  इस लिए पत्रकार अपने कार्यों को छोड़ने पर विबस हो गए हैं। पत्रकारों के लिए सच छपना बड़ी चुनौती बनी हुई है। अगर पत्रकार सच छपते हैं तो उन्हें जेल जाना पड़ता है या अपराधी की गोली खानी पड़ती है। वरिष्ठ पत्रकार अजीत ओझा और दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर इंटरमीडिएट अंग्रेजी की वायरल की हुई पेपर को उजागर करना और छापना एक फांसी के फंदे पर चढ़ने से कम न रहा इस तरह के दुर्व्यवहार से जिला से लेकर प्रदेश तक पत्रकारों में रोष व्याप्त है पत्रकारों का कहना है कि हम लोग लोकतंत्र के चौथे स्तंभ है और हम लोगों के साथ इस तरह की घटना घट रही है तो हम लोग एक साथ पूरे प्रदेश में पत्रकारिता छोड़ने पर विवश हो जाएंगे। जिला प्रशासन द्वारा पत्रकारों के ऊपर लगे संगीन धाराओं को नही हटाए गए तो पत्रकारों का प्रतिनिधिमंडल का इस घटना को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से मिलकर अपनी पीड़ा को रखने का काम करेंगे।



रिपोर्ट  गांधी पांडेय

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