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भूदान आन्दोलन का गवाह गांधी चबूतरा,अस्तित्व मिटने की कगार पर, आक्रोश




रतसर (बलिया):विकास खण्ड गड़वार क्षेत्र के न्याय पंचायत जनऊपुर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की याद में बना चबूतरा आज अपने अस्तित्व के लिए जूझ रहा है। जन प्रतिनिधि हो या जिम्मेदार सभी की बेरुखी के कारण ऐतिहासिक धरोहर एवं आजादी के प्रतीक के रूप में चबूतरे का अस्तित्व खत्म होने की कगार पर है। उचित रख रखाव न होने के कारण कतिपय दबंग लोगों द्वारा अवैध रूप से कब्जा जमा लिए जाने के धीरे- धीरे सिमटता जा रहा है। आज चबूतरा के चारो तरफ झाड़-झंखाड़ उग आए है। विगत दो वर्ष पूर्व ग्रामीणों ने उक्त स्थान पर ग्राम सचिवालय एवं सामुदायिक शौचालय बनाने के लिए खण्ड विकास अधिकारी को लिखित रूप से आवेदन भी किया था । गांव के बब्बन पाण्डेय, गणेश पाण्डेय, पं०परमहंस जी, मदन मोहन पाण्डेय, सीताराम राजभर आदि ग्रामाणों ने बताया कि इसी गांधी चबूतरे से सन् 1942 में भूदान आंदोलन के प्रणेता विनोवा भावे ने अपनी यात्रा के दौरान स्वतन्त्रता आन्दोलन को धार देने के लिए लोगों में आजादी का जज्बा भरा था और लोगों से आजादी की लड़ाई में सहयोग की अपील की थी। उसी समय से इस स्थान को क्षेत्र के लोग ऐतिहासिक धरोहर एवं आजादी के प्रतीक के रुप में सम्मान की दृष्टि से देखते है। पूर्व प्रधान राजेश पाण्डेय ने बताया कि गांधी चबूतरे के चारो ओर 20 डिसमिल से ज्यादा जमीन खलिहान की नाम से दर्ज है। ग्रामीणों ने उक्त स्थान पर जिले के आला अधिकारियों से लगायत ग्राम प्रधान को ग्राम सचिवालय एवं सामुदायिक शौचालय बनाने के लिए लिखित रूप से मांग भी की है। ग्राम प्रधान जितेन्द्र कुमार ने बताया कि ग्राम पंचायत से प्रस्ताव बनाकर ग्राम सचिवालय एवं सामुदायिक शौचालय के लिए भेजा गया है। राजस्व विभाग से मिलकर जल्दी ही उक्त स्थान को अतिक्रमण मुक्त कराकर निर्माण कार्य कराया जाएगा।

रिपोर्ट : धनेश पाण्डेय

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