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51 ,वी पुण्यतिथि पर याद किए भिखारी ठाकुर





बलिया सांस्कृतिक योद्धा भिखारी ठाकुर को याद किया जनपद के रंगकर्मियों और और संगीतकारों ने । भिखारी ठाकुर की 51 वीं पुण्यतिथि पर संकल्प साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था बलिया उ०प्र० के मिश्र नेवरी स्थित कार्यालय पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर जनपद के वरिष्ठ रंगकर्मी आशीष त्रिवेदी ने कहा कि भिखारी ठाकुर सांस्कृतिक योद्धा थे । जीवन पर्यन्त वे  अपने कला को हथियार बनाकर सामाजिक और सांस्कृतिक विडम्बनाओं के खिलाफ आवाज उठाते रहे। आशीष त्रिवेदी ने कहा कि भिखारी के नाटकों में पलायन का दर्द , स्त्री व्यथा , अनमेल विवाह , स्त्री स्वतंत्रता , धार्मिक आडम्बर पर गहरी चोट है ।  समाज के दबे कुचले लोगों को अपने टीम में शामिल करना उन्हें एक कुशल कलाकार बनाना और मंच पर प्रस्तुत करना भिखारी ठाकुर की अपने कला के प्रति प्रतिबद्धता थी ।  कला को चर्मोत्कर्ष पर ले जाकर सामाजिक सांस्कृतिक विडम्बनाओं पर चोट करने की अद्भुत क्षमता थी । अपने जीवन काल में ही भिखारी ठाकुर लिजेंड बन चुके थे ।  भोजपुरी क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि मशहूर कवि केदारनाथ सिंह ने उनकी तुलना गांधी की लोकप्रियता से की थी।इस अवसर पर लोक गीत गायक शैलेन्द्र मिश्र ने बिदेसिया का चर्चित गीत "करि के गवनवां भवनवा में छोड़ि कर , अपने परइल पुरूबवा बिदेसिया " और "पियवा गइलन कलकतवा ए सजनी " सुनाया । युवा गायक कृष्ण कुमार यादव मिट्ठू ने "कवने अयगुनवे पियवा हमें बिसरवल " , और पूर्वी गीत "खोलू - खोलू धनिया रे " सुनाया। इस अवसर पर रंगकर्मी आनन्द कुमार चौहान ,  अचिंत्य त्रिपाठी, ट्विंकल गुप्ता , तारकेश्वर पासवान , अनुपम पाण्डेय , नितिश इत्यादि दर्जनों कलाकार उपस्थित रहे ।


रिपोर्ट त्रयंबक पांडेय गांधी

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