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अनीति,अत्याचार,को त्याग कर संस्कार व मर्यादा के अनुसार जीवन जीना चाहिए:- जीयर स्वामी





दुबहर:- यज्ञ की अपनी एक मर्यादा होती है तामसी व हिंसामय  यज्ञ नहीं करना चाहिए। यज्ञ हमारे जीवन में सकारात्मकता लाते हैं, शास्त्रों में बतलाए गए नियमों के अनुसार ही यज्ञ करना चाहिए।  प्रकृति के संरक्षण के लिए यज्ञ आवश्यक है यज्ञ का वैज्ञानिक, आध्यात्मिक व सांस्कृतिक महत्व भी है।  

उक्त बातें भारत के महान मनीषी संत त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के कृपा पात्र शिष्य श्री लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज ने जनेश्वर मिश्रा सेतु एप्रोच मार्ग के निकट हो रहे चातुर्मास व्रत में अपने प्रवचन के दौरान कहीं।  

  

स्वामी जी ने कहा कि अनीति, अन्याय, अत्याचार को त्याग कर संस्कार व मर्यादा के अनुसार जीवन जीना चाहिए।     

जब तक हमारे शरीर में पुरुषार्थ है तब तक हमें अच्छे कर्म करते रहना चाहिए। पापी व्यक्ति अगर पाप का त्याग कर सदकर्मों में लग जाता है तो वह भी आदरणीय बन जाता है।   ऐसा श्रीमद्भागवत  में बताया गया है।  

उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को श्रीमद्भागवत कथा सुननी चाहिए। ईश्वर के अवतारों की चर्चा बार-बार सुननी चाहिए। 

स्वामी जी ने  कर्म के बारे में समझाते हुए विस्तार पूर्वक बताते हुए कहा कि कर्म करते समय व्यक्ति को सतर्क रहना चाहिए। क्योंकि कर्म का फल अकाट्य होता है। इसका फल मिलना बिल्कुल निश्चित है। क्योंकि जो जैसा कर्म करेगा, वैसा फल मिलेगा ही मिलेगा।व्यक्ति को मांसाहार का भोजन नहीं करना चाहिए। अपनी आत्मा की पूर्ति और जीभ के स्वाद के लिए दूसरे जीवो को मारकर खाना यह बहुत ही घोर अपराध है।



रिपोर्ट:- नितेश पाठक

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