धीमी गति से चल रहा कटान रोधी कार्य, ग्रामीणों में आक्रोश
रामगढ़, बलिया । हर वर्ष कटान से तटवर्तीय लोग बर्बाद होते हैं लेकिन सिंचाई और बाढ़ विभाग के साथ ही ठेकेदार मालामाल हो जाते हैं। हर वर्ष करोड़ों रूपये कटान रोधी कार्य के लिए सरकार देतीं हैं। बता दें कि बाढ़ विभाग द्वारा क्षेत्र के रामगढ़ में कटान रोधी कार्य चल रहा हैं। नेशनल हाईवे-31 को बचाने के लिए 8 करोड़ 30 लाख की लागत से एनएच-31 के किमी 27.230 से 27.270 के बीच रिवेटमेंट व रिपेयरिंग का कार्य हो रहा है। पूरे जिले में 14 परियोजनाओं पर 98.4 करोड़ का कटान निरोधात्मक कार्य चल रहा है।
जबकि हुकुम छपरा में एक ठोकर का कार्य चल रहा है। जिसमें मानक को ताक पर रख कर बचाव कार्य किया जा रहा हैं। जून महीने का दूसरा सप्ताह बीतने के कगार पर हैं तटवर्तीय लोगों की मानें तो अब तक 30 फीसदी भी कार्य पूर्ण रूप से तैयार नहीं हुआ है। लेकिन बाढ़ विभाग के अधिकारियों द्वारा 50% कार्य पूरा करने का दावा किया जा रहा है। हुकुम छपरा डेंजर पोवाइंट पर स्पर का कार्य भी चल रही है लेकिन 9 लेयर की जगह 3 लेयर का भी कार्य पूरा नहीं किया गया है मानक के अनुसार प्लास्टिक के बोरी में बालू भरकर नदी के 20 मीटर अंदर से सीढ़िनुमा रखनी थी जबकि विभाग द्वारा नदी के किनारे से ही बालू से भरी बोरियों को रखी गई है। जिसमें मानक की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अब तक अरबों रूपये से अधिक धनराशि कटान रोधी कार्य के नाम पर खर्च हो चुका हैं लेकिन बाढ़ और कटान से परेशान लोगों को एनएच-31 के पटरियों पर शरण लेना पड़ता है गांव के बुजुर्गों का कहना है कि पिछले दो वर्ष पहले तीन स्पर के लिए लगभग 34 करोड़ रुपये शासन द्वारा मिले थे लेकिन आज तक कोई भी स्पर गंगा नदी के लहरों का वेग सहन नहीं कर पाया। कटान रोधी कार्य आज भी अधूरा पड़ा हुआ है। अब कार्य की समय सीमा भी 15 जून को समाप्त हो जायेगी है, इसके बावजूद भी बचाव कार्य तीस फीसदी भी पूरा नहीं किया गया हैं।
करोड़ों खर्च मगर नहीं मिला निजात
रामगढ़। पिछले पांच सालों में शासन द्वारा कटानरोधी कार्य पर केवल दूबे छपरा में ही लगभग 90 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं लेकिन अफसोस ! इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बाद भी गोपालपुर, उदई छपरा, दूबे छपरा को कटान से महफूज नहीं कर पाया। शासन इन बस्तियों को बचाने के लिए धन अवमुक्त कराता गया और बाढ़ विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों के उदासीनता से कटान की भेंट चढ़ते गये। गत वर्ष पहले शासन द्वारा रामगढ़ से लेकर सुघर छपरा तक करोड़ो रूपये खर्च कर रिवेटमेंट कार्य किया गया था जो कि पिछले साल की बाढ़ में धरासायी हो गया।
कड़ी धूप की वजह से दोपहर में कटान रोधी कार्य नहीं हो पाता है गग्रामीणों द्वारा पहले भी मानक के विपरीत कार्य नहीं होने का आरोप लगाया गया है जो कुछ निराधार हैं मानक के अनुसार कार्य नहीं हो रहा है तो ग्रामीण ही कार्य करा ले, ठेकेदार के ऊपर दबाव बनाया गया है ताकि कार्य समय से पूरा कर लें।
संजय कुमार मिश्र
अधिशासी अभियंता, बाढ़, विभाग, बलिया
रिपोर्ट : रवीन्द्र मिश्र


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