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बिजली के न रहने पर बिना प्लेटफार्म के अंधेरे में ट्रेन में चढ़ने के लिए विवश है यात्री

 



रेवती (बलिया)  आजादी से पहले के स्थापित रेवती रेलवे स्टेशन को अप्रैल 2023 में हाल्ट घोषित कर यात्री सुविधा विहिन कर दिया गया। स्टेशन बहाल करने के लिए स्टेशन बहाल करो संघर्ष व व्यापार मंडल के संयुक्त तत्वावधान में 20 अक्टूबर 2024 से 29 दिसंबर तक 71 दिनों तक सर्व दलीय जन आंदोलन चलाया गया। 2025 में सांसद सलेमपुर रामाशंकर विद्यार्थी द्वारा संसद सत्र में रेलमंत्री से लगाए, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष,पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक गोरखपुर तथा डीआरएम वाराणसी को ज्ञापन देकर स्टेशन बहाल करने की मांग की गई।

विडंबना की बात है कि यहां चार जोड़ी एक्सप्रेस व चार जोड़ी पैसेंजर ट्रेनों का ठहराव के बावजूद साफ सफाई, पेयजल, शौचालय, यात्री टीन शेड आदि की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई है। एलाउंसमेंट के अभाव में सायं 7 बजे अप छपरा लखनऊ उत्सर्ग एक्सप्रेस ट्रेन में एक दिन के अंतराल पर ऐसी की बोगी कभी आगे तो कभी स्लीपर के पीछे लगने से बिजली के न रहने पर बड़े, बुजुर्ग, महिलाओं, बच्चों सहित यात्रीयों को ट्रेन में चढ़ने उतरने में काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बलिया रेलखंड के बीच सुरेमनपुर व सहतवार के बाद यह तीसरा सर्वाधिक आय वाला स्टेशन है। औसत यहा प्रतिदिन 14 से 15 हजार तथा महिने में चार लाख से अधिक टिकट की बिक्री है। यदि यहां कंप्यूटरीकृत टिकट की बिक्री की व्यवस्था सुनिश्चित हो जाए तो इसकी आमदनी और अधिक हो जाएगी। जनहित में नगर क्षेत्र वासियों ने रेल मंत्रालय से यथाशीघ्र स्टेशन बहाल कर यात्री सुविधा का विस्तार किए जाने की मांग की है।




पुनीत केशरी

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