धर्म-अधर्म के संघर्ष,अहंकार के विनाश और ईश्वर के न्याय का प्रतीक है : पं.शीतल प्रकाश
गड़वार (बलिया) कस्बा क्षेत्र के दामोदरपुर गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का सोमवार को समापन किया गया। कथा के अंतिम दिन कथा वाचक ने कथा का सारांश कह जीवन को जीने की कला भी समझाई। उन्होंने कई उपदेशात्मक वृतांत सुनाकर भक्तों को निहाल भी किया। कथा व्यास पं.शीतल प्रकाश ने कंस वध की कथा में बताया कि श्रीकृष्ण मथुरा पहुंचकर कंस के बुलावे पर उसके शक्तिशाली पहलवानों चाणूर, मुष्टिक और अंततः स्वयं कंस का वध करते है,उसे सिंहासन से खींचकर,केश पकड़कर पटकते है और वध करके मथुरा को अत्याचार से मुक्त कराते है। उन्होंने कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है,भगवान अवतार लेते हैं। उन्होंने सुदामा चरित्र को विस्तार से सुनाया। कृष्ण और सुदामा की निश्छल मित्रता का वर्णन करते हुए बताया कि कैसे बिना याचना के कृष्ण ने गरीब सुदामा का उद्धार किया। मित्रता निभाते हुए सुदामा की स्थिति को सुधारा। गौ वध का विरोध और गौ सेवा करने पर भी जोर दिया। वहां व्यास पीठ से कथा वाचक ने आए हुए क्षेत्रीय पत्रकारों को अंगवस्त्र,पंचमुखी शंख,डायरी,कलम देकर सम्मानित करते हुए अपना आशीर्वचन दिया। कथा समापन कार्यक्रम के बाद आरती की गई। मंगलवार को भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा। यजमान के रूप में पूर्व प्रधान विजयशंकर पाण्डेय सपत्नीक मौजूद रहे।
रिपोर्ट : डी.पाण्डेय


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