होली केवल एक पर्व नही,बल्कि भारत की धड़कनों में गूंजता समरसता का संगीत है : राजेश
रतसर (बलिया) भारत उत्सवों की भूमि है,तीज- त्योहारों की पावन धरा है। किसी समाज में पर्वों की निरंतरता उसकी सांस्कृतिक समृद्धि और सामुहिक उल्लास का संकेत मानी जाती है। होली केवल एक पर्व नही, बल्कि भारत की धड़कनों में गूंजता समरसता का संगीत है। उक्त बातें पूर्व प्रधान व प्रवक्ता राजेश पाण्डेय ने कही। उन्होंने बताया कि बसंती बयारों के बीच जब नवकोपल, नवपुष्पों के मोहक वर्णों और सुगंध से प्रकृति सुशोभित-सुवाषित हो रही होती है,ऐसे ही अवसर पर इंद्रधनुषी रंग-भाव लिए आता है,होली का त्योहार।उसके आगमन की आहट से रोम-रोम पुलकित हो उठता है। उल्लास-उमंग को संग लिए रंगोत्सव हमें जीवन के हर रंग को आत्मसात करने का भी संदेश देता है। इस पर्व की सबसे बड़ी शक्ति यही है कि यह सामाजिक दीवारों को नरम कर देता है और हमें याद दिलाता है कि यदि एक दिन के लिए हम भेद भूल सकते है तो सदा के लिए क्यों नही ? रंग केवल बाहरी पदार्थ नहीं,बल्कि भावनाओं के प्रतीक है। आज जब समाज भिन्न विचारों और पहचानों से बंटता जा रहा है, तब होली का उत्सव हमें संदेश देता है- मतभेद छोड़ों,मनभेद छोड़ो, क्षमा करो,गले मिलो। यह पुनर्मिलन का संस्कार है।
रिपोर्ट : डी.पाण्डेय


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