भारती ज्ञान प्रणाली को जानने लिए हमें पेड़ पर कौन सा फल लगा है पहचानने के साथ उसके जड़ को देखना पड़ेगा : प्रो० सैयद ऐंनुल हसन
रेवती (बलिया) भारतीय ज्ञान प्रणाली: वतर्मान परिदृश्य एवं विकसित भारत के परिप्रेक्ष्य में भूमिका * विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सोमवार को गोपाल जी महाविद्यालय रेवती के बहुदेशीय सभागार में आयोजित की गई। मुख्य अतिथि मौलाना आजाद नेशनल उर्दू विश्वविद्यालय हैदराबाद के कुलपति प्रो० सैयद ऐंनुल हसन ने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली को जानने के लिए हमें पेड़ पर कौन सा फल लगा है पहचानने के साथ उसके जड़ को देखना चाहिए। जिसे हमने देखना बंद कर दिया। तभी हम विकसित भारत की परिकल्पना को साकार कर पाएंगे।
* विशिष्ट अतिथि काशी विद्यापीठ वाराणसी के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं डीन प्रो० अरविंद पांडेय ने कहा कि विद्यार्थी को जिज्ञासु होना चाहिए। इसके लिए गुरु शिष्य में संवाद होना चाहिए। गुगल से जानकारी मिल रही है उससे भारतीय ज्ञान प्रणाली व परंपरा को नही समझ पाएंगे। विश्वविद्यालय में विद्यार्थी नही आ पा रहे हैं । संवाद में कमी आई है। सरकार भारतीय प्राचीन शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए नई शिक्षा नीति पर कार्य कर रही है।
* पहले दिन के संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए जेएनसीयू के कुलपति प्रो० संजीत कुमार गुप्त ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि की की बातों की समीक्षा करते हुए उनके विचारों से अपनी सहमति जाहिर की तथा विद्यार्थियों को बातों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। कहा ऐआई ने हमारे जीवन पद्धति को प्रभावित किया है किन्तु रामायण, महाभारत, बुद्ध के अष्टांग मार्ग को बिना जाने हम भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे नहीं बढ़ा सकते। कार्यक्रम के पूर्व कुलपति द्वव्य द्वारा दीप प्रज्ज्वलित किया गया। महाविद्यालय के प्रबंधक अशोक कुमार श्रीवास्तव, प्राचार्य डॉ राजेश श्रीवास्तव ने अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह से सभी अतिथियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन प्रवक्ता जीतेंद्र दुबे ने किया। इस दौरान कार्यक्रम के संयोजक देवेंद्र सिंह,गुरू शरण वर्मा संतोष सिंह, राजीव रत्न श्रीवास्तव, डां काशीनाथ सिंह, राकेश वर्मा आदि मौजूद रहे।
पुनीत केशरी


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