वायरल रागिनी के बाद अब गुमनाम रागिनी की पुकार, इलाज और शिक्षा के लिए मदद की दरकार।
मनियर (बलिया)। एक पैर से दिव्यांग रागिनी राजभर की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो शासन-प्रशासन और समाजसेवियों ने आगे बढ़कर उसकी मदद की। अब मनियर में ही एक और सात वर्षीय रागिनी सामने आई है, जिसकी जिंदगी की मुश्किलें शायद ही किसी से छिपी हों, लेकिन उसकी आवाज अब तक जिम्मेदारों तक नहीं पहुंच सकी है।
नगर पंचायत मनियर के वार्ड नंबर 14 उत्तर टोला, झुमक बाबा स्थान पर रहने वाली रागिनी यादव जन्मजात दिव्यांग है। वह दोनों पैरों से लड़खड़ाकर चलती है और उसके हाथ भी काम नहीं करते। वह मुख-बधिर भी बताई जा रही है। आर्थिक तंगी के कारण आज तक उसका समुचित इलाज नहीं हो सका और न ही वह स्कूल जा पाती है। उसका दिव्यांग प्रमाण पत्र भी नहीं बना है और उसे किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पाया है।
रागिनी की मां चंपा देवी का 25 अप्रैल 2026 को कैंसर से निधन हो गया। परिवार की जिम्मेदारी अब पिता जयप्रकाश यादव पर है, जो फोर व्हीलर वाहन चालक हैं। रागिनी की देखभाल उसकी दादी द्रुपती देवी करती हैं। परिवार करीब 30 वर्ष पूर्व सरयू नदी की कटान से प्रभावित होकर यहां आकर बसा था। रागिनी की बड़ी बहन कुमकुम कक्षा छह और भाई आदित्य कक्षा तीन में पढ़ते हैं।
गांधी इंटर कॉलेज सिकंदरपुर के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य एवं विधानसभा बांसडीह क्षेत्र के समाजवादी पार्टी अध्यक्ष उदय बहादुर सिंह ने रागिनी के घर पहुंचकर परिवार का हाल जाना और उसकी मदद कीआवश्यकता बताई।
अब परिवार और ग्रामीणों की उम्मीद जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों एवं समाजसेवियों से है। जरूरत है कि जिलाधिकारी इस मामले का स्वतः संज्ञान लेकर रागिनी का दिव्यांग प्रमाण पत्र, चिकित्सकीय जांच, समुचित इलाज, शिक्षा तथा पात्र सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की पहल करें। सात साल की इस मासूम को भी वह जिंदगी मिलनी चाहिए, जिसकी वह हकदार है।
रिपोर्ट - मनु तिवारी


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