नन्हीं लेखिका गार्गी पाठक ने कविता में बयां की बेटियों के मन की बात
दुबहर । आजादी के महानायक अमर शहीद मंगल पांडेय के पैतृक गांव नगवा की रहने वाली गार्गी पाठक ने अपनी लेखनी के माध्यम से बेटियों के सम्मान, अधिकार और आत्मसम्मान का संदेश दिया है। सनबीम स्कूल में कक्षा पांचवीं की छात्रा गार्गी ने लड़कियां शोर से नहीं डरती बस खामोशी चुन लेती है।
शीर्षक से एक कविता लिखी है, जिसमें उसने बेटियों की भावनाओं, उनकी आवाज और समाज में उनके स्थान को बेहद संवेदनशीलता के साथ अभिव्यक्त किया है।
गार्गी की कविता में बेटियों के प्रति समाज की सोच, उनके सपनों और उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे महत्वपूर्ण विषयों को स्थान मिला है। अपनी कविता के माध्यम से नन्हीं लेखिका ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि बेटियों को केवल सुनना ही नहीं, बल्कि समझना भी जरूरी है। उनकी भावनाओं का सम्मान करना और उन्हें अपनी बात कहने का अवसर देना समाज की जिम्मेदारी है।
कक्षा पांचवीं में पढ़ने वाली गार्गी की इस रचनात्मक पहल में कम उम्र में ही सामाजिक विषयों के प्रति उसकी संवेदनशीलता दिखाई देती है। कविता के साथ बनाए गए चित्र भी उसकी रचनात्मक अभिरुचि को दर्शाते हैं।
अमर शहीद मंगल पांडेय की ऐतिहासिक विरासत से जुड़े नगवा गांव की इस नन्हीं प्रतिभा ने अपनी कविता के माध्यम से यह संदेश दिया है कि बेटियों को कमजोर समझने के बजाय उनकी आवाज को सुनना और उनके सपनों को उड़ान देना चाहिए।
गार्गी की यह रचना बाल प्रतिभा, साहित्यिक अभिरुचि और सामाजिक चेतना का सुंदर उदाहरण है। उसकी इस पहल से यह उम्मीद जगती है कि आने वाले समय में वह अपनी लेखनी के माध्यम से समाज के महत्वपूर्ण विषयों को आवाज देती रहेगी
रिपोर्ट त्र्यंबक पांडेय गांधी



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