अद्भुत : यहाँ ‘जलेबी' खिलाकर होता है सुगर का उपचार
- पकड़ी धाम में शनिवार को लगता है भक्तों का रेला
बलिया। शहर से सटे करीब पांच किमी0 की दूरी पर अवस्थित पकड़ी गाँव वैसे तो अपनी विशिष्टता के लिए पहले से ही मशहूर रहा है, लेकिन इन दिनों यह गाँव राष्ट्रीय फलक पर अपनी पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। कारण है कि यहॉ आने वाले लोगों का महज औषधी रुपी मां काली के प्रसाद से कई असाध्य रोगों का सहज व सरल उपचार हो जाता है,जो जनमानस के लिए वरदान साबित हो रहा हैे। यही कारण है कि गाँव में स्थित मां काली का स्थान अब पकड़ी धाम के रुप में मशहूर हो चला है और यहां पर प्रत्येक शनिवार को प्रदेश के अलावा और प्रांतों के लोग भी आते और अपनी मुरादों की खातिर मत्था टेकते है।
विदित हो कि पकड़ी की माँ काली मंदिर की के पुजारी रामबदन भगत के हाथों मिले औषधीय रूपी प्रसाद नेे कईयों की तकदीर संवार दी है। यही कारण है कि पकड़ी गांव अब पकड़ी धाम के रूप में विख्यात हो गया है और देश के गैर प्रांतों के लोग अपनी समस्या के समाधान की खातिर माँ काली के मंदिर में मत्था टेकने आते है।
दरअसल, बात तब कि है जब पकड़ी गाँव के बालचंद राम के चार पुत्रों में तीसरे नम्बर का पुत्र रामबदन राम हिन्दुस्तान पेट्रोलियम में वाहन चालक का कार्य करता था। एक बार जब वह गाँव आया तो अन्यास ही उसके मन यह भाव आया कि गांव में पोखरे की खुदाई कराई जाये। फलस्वरूप गांव में पोखरे की खुदाई कराकर वह वापस नौकरी में चला गया, लेकिन विड़बना कहे या फिर ईश्वरीय कृपा कि इसी दरम्यान उसका स्वास्थ्य बिगड़ गया और जब चिकित्सकीय परीक्षण हुआ तो पता चला कि उसकी किडनी खराब हो गयी है। रामबदन निराश होकर घर आ गया और परेशान रहने लगा।
उसकी निरंतर बिगड़ती मनोदशा को देख घरवालों ने उसे देवी काली की उपासना करने का सुझाव दिया। तभी से वह मां की पूजा करने लगा। लोगों का मानना है कि रामबदन की अराधना से प्रसन्न मां ने उसे एक विशिष्ट प्रकार की औषधी प्रदान की, जिसके सेवन मात्र से चमत्कारी परिणाम सामने आया और रामबदन पूर्णतया स्वस्थ हो गया। फिर क्या था वह मां की सेवा में अपना सर्वस्व समर्पित करते हुए मां की पूजा में ही लीन रहने लगा। धीरे-धीरे जब यह बात आस-पास के गांव में पहुँची तो लोग आश्चर्य व विस्मय में पड़ गये और उसे देखने तथा मां की कृपा पाने के लिए पकड़ी गाँव की ओर आने लगे। शनै-शनै यह कारवां बढ़ता गया और आज आलय यह है कि प्रत्येक शनिवार को यहां भक्तों का भारी हुजूम इकठा होता है। जिसमें अधिसंख्या बिहार, छत्तीस गढ़, मध्यप्रदेश, झारखंड दिल्ली, हरियाणा आदि प्रांतों के लोग शामिल रहते है।
बड़े-बड़े अस्पतालों से निराश होकर लौटे लोग पकड़ी धाम की माँ काली की दहलीज पर मत्था टेकने और पुजारी राम बदन भगत द्वारा दिये गये औषधी रूप प्रसाद का सेवन करने मात्र से अपनी तकदीर व तस्वीर दोनो संवार रहे है। दूर-दराज से आयें भक्तों का मिल रहे चमत्कारी लाभ व मां के आशिर्वाद के संदर्भ में पुजारी राम बदन भगत का कहना है कि सब कुछ माँ की कृपा का प्रतिफल है। माता के मंदिर के बारे में जानकारी देते हुए भगत कहते है कि यह मंदिर वर्षों पुराना है और यह मां काली के तेज का ही परिणाम है आस्थावान लोग असाध्य मर्ज से ग्रसित होकर यहां आते है और निरोगी काया लेकर जाते है।
उनका कहना है कि वह मां का प्रसाद स्वरूप भक्तों का भभूत, फकिया और तेल देते है, जिसके सेवन मात्र से बडे़े से बड़ा असाध्य मर्ज काफूर हो जाता है। रामबदन बताते है कि मॉ काली की पूजा की प्रथा उनके परिवार में 700 वर्षो से हैं। उनके परिजनांे द्वारा स्थापित 700 वर्ष पुरानी मॉ की प्रतिमा आज भी हैं, ओैर उस मन्दिर में चमत्कारी नीम का पौधा हैं जिस पर आज भी गुड़हल का फूल लगता हैं।
सुगर जैसी असाध्य बिमारी का इलाज रामबदन भगत जलेबी खिला कर करने का दावा करते है। रामबदन अबतक केंसर, ब्रेन टयूमर तथा अन्य कई बिमारियों का सफल इलाज करने में सफल रहें हैं। रामबदन मॉ के मन्दिर के निर्माण के नाम पर किसी प्रकार का चंदा लेने से इंकार करते है तथा मन्दिर परिसर में जीव हत्या की सख्ती से मुखालाफत करते हैं।



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