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जानें कब है बसन्त पंचमी, जानें मुहूर्त माँ सरस्वती की आँख खुलने का



रतसर(बलिया) बसन्त पंचमी माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। जिसे सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन का धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भारतीय समाज में काफी महत्व है। पुराणों के अनुसार इस दिन ब्रह्मा जी ने देवी सरस्वती का सृष्टि में आह्वान किया था और देवी का प्राकट्य हुआ था। यही वजह है कि युग-युग से इस दिन लोग देवी सरस्वती की पूजा करते आए है। इस दिन ज्ञान की वृद्धि और उन्नति के लिए बच्चों की शिक्षा शुरू करने की परम्परा हैं।
जाने इस साल कब मनाई जाएगी बसंत पंचमी :
सर्व सिद्ध मुहूर्त के रूप में मनाया जाने वाला बसंत पंचमी के त्योहार को लेकर इस इस साल उलझन की स्थिति बन गई है क्योंकि माघ शुक्ल पंचमी तिथि का आरंभ 29 जनवरी को सुबह 10 बजकर 46 मिनट पर हो रहा है। स्थानीय समय के अनुसार इसमें कुछ आगे-पीछे हो सकता है। बसन्त पंचमी तिथि का समापन 30 जनवरी को दोपहर बाद 1 बजकर 20 मिनट पर हो रहा है। यही कारण है कि 29 जनवरी और 30 जनवरी को लेकर ज्योतिषियों के बीच संशय उत्पन्न हुआ है।
30 जनवरी को ही मनाई जाएगी सरस्वती पूजा :
हिन्दू धर्म में शास्त्रीय मत यह है कि जिस दिन उदय तिथि हो यानी सूर्योदय जिस तिथि में हो पूरे दिन उसी तिथि का मान होता है। दूसरी बात कि पितरों की पूजा मध्य काल में होती है और देवी -देवताओं की प्रथम प्रहर में इसलिए जिस दिन सूर्योदय के समय तिथि का आरंभ हो उसी दिन देवी-देवताओं का पूजन किया जाना चाहिए। शास्त्रों का मत है कि सूर्योदय के समय अगर तिथि कुछ समय के लिए भी लग रही हो तो उसी तिथि का मान होता है और उसी तिथि में पूजन किया जाना चाहिए I इस नियम के अनुसार सरस्वती पूजन गुरुवार 30 जनवरी को किया जाना शास्त्र सम्मत होगा। इस दिन गुरुवार भी है जिससे यह ज्ञान की देवी सरस्वती के पूजन के लिए सर्वथा उचित तिथि है।
मूर्ति विसर्जन कब करे :
मूर्ति विसर्जन 31 जनवरी को किया जाना उचित होगा। इस दिन शाम के 6 बजकर 10 मिनट के बाद का समय उत्तम होगा क्योंकि पंचक भी समाप्त हो जाएगा। आपको बता दे कि ऐसी भी मान्यता है कि बेटी की विदाई और देवी की मूर्ति का विसर्जन गुरुवार को नही करना चाहिए।




रिपोर्ट : धनेश पांडेय

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