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रस्म अदायगी भर सिमटी विकास पुरुष की पुण्यतिथि



रसड़ा (बलिया)। सियासत के समन्दर में वर्षों चले मन्थन के बाद पूर्वाचल की पूरी छोर पर बसा बागी बलिया व मऊ कि धरती में दो सियासी सूरमाओं जन्म हुआ। एक  बागी बलिया के इब्राहीम पट्टी गाँव  के एक साधारण किसान परिवार का नाम रोशन कर भारत के प्रधानमन्त्री बना और आजीवन युवा तुर्क की ऊपाधि से विभूषित रहा।  जिसके नाम मात्र पर सियासत थर्रा उठती और संसद में सियापा पसर जाता था। वो चंद्रशेखर  रहे,जो अब  इस दुनियाँ में नहीं रहे।

दूसरा सपूत मऊ की महकती माटी के गाँव  सेमरी जमाल पुर में पैदा हुआ।  जिसके पैरों तले विकास की गंगा प्रवाहित होती रही।जिसने ना सिर्फ मऊ को एक बल्कि विकास के उस मुकाम तक पहुंचाया  जहां से मऊ  इठराता व इतराता रहा। यह वह  कल्पनाथ राय ही थे जिनके निधन के बाद  न सिर्फ मऊ का विकास ठप्प हुआ  बल्कि  वह अपने पिछड़ेपन  और बदहाली पर आंसू बहा रहा है।

हालांकि विकास पुरुष के रूप में जाने जाने वाले स्वर्गीय कल्पनाथ राय की पुण्यतिथि अब महज  रस्म अदायगी भर रह गया है। आज स्वर्गीय कल्पनाथ राय के मूर्ति  पर  फूल मालाओ' को समर्पित  करने वाले भले स्वयं को धन्य मान रहें हो।  लेकिन कल्पनाथ के निधन से मऊ जनपद सहित घोसी लोकसभा बेसहारा बेचारा हो गया। पुर्वाञ्चल में विकास ठप हो गया है और समरसता व भाई चारगी खत्म हो गयी है।  

मानों उपेक्षा के आलम में सिसकने से तमसा का पानी काला हो गया। ठीक उसी तरह विकास के नाम पर भी जनपद का दिवाला हो गया। तमसा का निर्मलीकरण की तरह मऊ विकास के आधुनिकरण के लिये पल पल तरस रहा है ।
बदलते समय में मऊ की परिभाषा बदल गयी, लोगों की अभिलाषा बदल गयी। अब तो यहाँ नेता आते प्रवासी है चारो तरफ फैली है उदासी। न तो उन्हें विकास चाहिये न उन्हें कोई खास चाहिये? सब के सब जातिवादी है भले ही पहने खादी है।

 कल्पनाथ राय के सपनों का शहर बिरान हो गया ?सूना गाँव  खेत खलिहान हो गया है। अब तो हर तरफ तमाशा है लोगों के मन में निराशा है। सभी बने तमाशायी है अब कहीं नहीं विकाश की बात होती है। कमीशन खोरी चोरी के चलते हर तरफ तबाही है। इसी लिये तो आज विकाश पुरूष स्व. कल्पनाथ राय की बहुत याद आयी है।

ऐसे महान पुरूष कर्म योद्धा सियासत के दुनियाँ में अलग पहचान  बनाकर इतिहास रचने वाले माँ बसुन्धरा के अप्रतिम धरोहर मऊ की विप्लवी  धरती की शान विकास पुरूष स्व कल्पनाथ राय सहित स्व चन्द्रशेखर जी को व्यथित मन से विनम्र  श्रद्धान्जली  शत शत नमन् ।


रिपोर्ट पिंटू सिंह

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