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मां की कृपा से पूजा ने रोशन की पति की दुनिया




बलिया: इसे चमत्कार करें या मां काली की कृपा, लेकिन हैं हकीकत तभी तो भरी जवानी में दोनों आंखों की रौशनी गंवा चुके रसड़ा थाना क्षेत्र के संवरा गांव निवासी शैलेश सिंह पुत्र विक्रमा सिंह फिर से न सिर्फ इस दुनिया का दीदार कर रहे हैं बल्कि अपना परिवारिक जीवन भी हंसी-खुशी व्यतीत कर रहे हैं.


 हुआ यूं कि सांवरा गांव निवासी शैलेश की आंखों से अचानक पानी गिरना शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे उनकी आंखों की रोशनी जाने का कारण बना. हालांकि शैलेश में अपनी आंखों के उपचार के लिए बलिया से लेकर चेन्नई तक के नेत्र विशेषज्ञों के यहां पर लगाई लेकिन कहीं कोई राहत नहीं मिली. अलबत्ता पूर्व में इस दुनिया को कर अपनी आंखों से दीदार करने वाले शैलेश आंखों से पानी गिरने के कारण पूरी तरह से अंधे हो चले थे. इससे उनकी पत्नी पूजा काफी व्यथित और परेशान रहती थी. परिजनों ने शैलेश की आंखों के इलाज के लिए चेन्नई के नामचीन अस्पतालों में उपचार कराया लेकिन डॉक्टरों ने साफ मना कर दिया. जिससे परिवार वाले यह मान बैठे थे कि बाकी बची उम्र अब शैलेश को अंधे बनकर ही गुजारनी पड़ेगी लेकिन शैलेश की पत्नी के मन में उम्मीद की किरण सिम चला रही थी. इसी दौरान उसे किसी ने पकड़ी धाम स्थित मां काली मंदिर की महिमा बताई और वहां शैलेश को ले जाने की नसीहत दी.

इतना सुनना था कि पूजा ने अगली भी नहीं पति शैलेश को लेकर मां के दर में हाजिरी लगाई और मंदिर के पुजारी तथा मां काली के अनन्य उपासक रामबदन भगत से अपनी आपबीती बताई. पूजा की पीड़ा सुन पुजारी में तत्काल शैलेश को मां का प्रसाद दिया और कुछ औषधियां सेवन करने के लिए भी दी. जिनके प्रभाव से न सिर्फ शैलेश के आंखों से पानी गिरना बंद हुआ बल्कि धीरे-धीरे उसकी आंखों की रोशनी जी वापस लौटने लगी. मां की कृपा से अब शैलेश न सिर्फ इस हरी भरी दुनिया का दीदार कर रहा है बल्कि वाहन आदि चलाने में भी पारंगत हो गया. मंदिर के पुजारी रामरतन भगत बताते हैं जब शैलेश की आंखों से नहीं दिखाई देता था तब उसकी पत्नी उसे लेकर घंटों मंदिर परिसर में बैठी रहती थी और मां के दर पर रोती रहती थी मां ने उसकी फरियाद सुनी और उसकी पीड़ा को दूर किया.



इस औषधि ने दिखाया था अपना प्रभाव

फेफना थाना क्षेत्र के पकड़ी धाम स्थित मां काली मंदिर के पुजारी व मां के अनन्य सेवक राम बदन भगत कहते हैं कि शैलेश के ठीक होने में और उसकी आंखों से बहता पानी बंद होने में मां  काली की कृपा से त्रिकोल नामक औषधि, जिसे देहात क्षेत्रों में  वन कुदुरूनी के नाम से भी जाना जाता है ,ने भी प्रभाव दिखाया था. उन्होंने बताया कि यह सहायता से उपलब्ध होने वाली औषधीय है और सिर दर्द के साथ साथ आंखों से पानी गिरने तथा कम दिखाई देने में भी काफी प्रभावी है.

डेस्क

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