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डॉक्टरों ने कहा था जीने के लिए काटने होंगे पैर, मां के प्रसाद से जाता रहा सुदर्शन का मर्ज

 



बलिया: यह चमत्कार से कम नहीं जिस युवक के पैरों में हुए घाव ना सूखने के कारण भी बीएचयू के डॉक्टरों ने दोनों पैरों को काटने की सलाह दी थी और पत्नी ने इसके लिए रुपए भी जमा कर दिए थे, उसे पकड़ी धाम स्थित मां काली की कृपा से आज ना सिर्फ नया जीवन मिला है बल्कि उसके दोनों पैर भी सलामत है और वह अपना सामान्य जीवन व्यतीत कर रहा है.




बिहार प्रांत के बक्सर जनपद अंतर्गत ब्रह्मपुर थाना क्षेत्र के भरकर गांव निवासी सुदर्शन महतो परिवार के गुजर-बसर के लिए दुबई में नौकरी करने गया था. वहां उसके अचानक तबीयत खराब हो गई और लगातार 21 दिन तक वह  बीमार रहा. घर वापस आने के बाद उसके दोनों पैरों ने काम करना बंद कर दिया. इसके बाद उसकी पत्नी मंजू देवी ने उसके उपचार के लिए तमाम डॉक्टरों से संपर्क किया, लेकिन कोई लाभ नहीं मिला.निराश होकर वह बीएचयू पहुंची, जहां चिकित्सकों ने सुदर्शन के जीवन की रक्षा के लिए दोनों पैरों और दोनों हाथ की कलाइयों को काटने की बात कही. हालांकि इस पर भी मंजू ने सहमति दे दी और उसके लिए धन जमा कर दिया, लेकिन यह जानकारी जब सुदर्शन को हुई तो वह बेहोश हो गया.मंजू पति को वापस ले कर घर आ गयी.





इसी बीच किसी ने उसे पकड़ी धाम स्थित काली मंदिर न जाने और मां के अनन्य उपासक और मंदिर के पुजारी रामबदन भगत से मिलने की बात कही.  उसने बिना समय गवाएं अपने पति को लेकर पकड़ी धाम स्थित काली मंदिर आ गई. हालांकि उस दिन शुक्रवार था और मंदिर में शनिवार को नियत समय पर पूजा होनी थी. इसलिए मंदिर के पुजारी रामबदन भगत ने शनिवार की सुबह आने को कहा. मंजू पुनः शनिवार को अपने पति को लेकर मंदिर परिसर में आई और मां से अनुनय विनय के पश्चात पुजारी से अपनी व्यथा सुनाई.

इसके उपरांत रामबदन भगत उसे मां का प्रसाद देने के साथ ही गठिवन( छछूंदर घास) नाम की एक औषधि दी और उसे पीसकर फिटकरी के साथ गरम पर के दोनों पैरों पर लेप लगाने को कहा. मंजू बताती है कि औषधि का लेप  लगाते ही शुरुआती दिनों से ही पति का मर्ज ठीक होने लगा और आज वह न सिर्फ पूर्णतया स्वस्थ है बल्कि घर गृहस्ती के कामों को भी सहजता से कर रहा है.

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