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लखीमपुर खीरी की घटना लोकतंत्र पर कालिख: राम इकबाल

 


बेल्थरारोड, बलिया। सूबे के पंचायत चुनाव में वोटो की खरीद फरोख्त, हिंसा, नारी अपमान ने सरकार और सिस्टम की पोल खोल कर रख दी है । इन घटनाओं से मर्माहत पूर्व विधायक राम इकबाल सिंह रविवार को अपनी ही सरकार और संगठन पर अखबारों से बातचीत में जमकर बरसे। कहे कि हम शास्त्रों में द्रौपदी के चीर हरण के बारे में पढ़े थे, कभी देखे नहीं थे। चुनाव में लखीमपुर खीरी में एक नारी का चीरहरण हो रहा था और पूरा प्रशासन नपुंसक होकर देख रहा था। यह कैसा लोकतंत्र है। जहां महिलाओं को नंगा किया जा रहा है, उसे जनता बर्दास्त कर पाएगी। यह लोकतंत्र पर कालिख है, सरकार को माफी मांगनी चाहियें । संविधान में चुनाव कराने की जिम्मेदारी चिन्हित की गई है। चुनाव में उस जिम्मेदारी का निर्वहन निश्चित रूप से नहीं किया गया है। पूर्व विधायक कहे कि ददरी मेला के गाय भैंस की तरह वोट खरीदना लोकतंत्र पर कलंक है। इससे हमारे युवा व किशोर क्या सीखेंगे। यदि यह समाज नहीं चेंता तो निश्चित ही भविष्य में भारत का लोकतंत्र नहीं बचेगा।

                पूर्व विधायक श्री सिंह कहे कि सरकार और संगठनों के लोग बैल भैंस की तरह वोटो की बोली लगा रहे है। सरकार और संगठनों के बड़े बड़े नुमाइंदे वोट खरीदने के लिए अपने आचरण को एल्युमिनियम की वर्तन की तरह आग पर चढ़ा दिए। इससे समाज क्या सीखेगा।  क्या इसी दिन के लिए हमारे क्रांतिकारियों ने शहादत दी थी। जहा महिलाओ को नंगा किया जा रहा है। डीएम एसपी बदमाशो की तरह वोट छीन रहे है। बलिया चुनाव पर बोलते हुए कहे कि बलिया में छः फर्जी वोट पकड़े गए, उन्हें कोतवाली भेज दिया गया। फिर छोड़ दिया गया। कहे कि दूसरे का वोट देना अपराध की श्रेणी में आता है। किन लोगो ने फर्जी सर्टिफिकेट बनाई थी, उन फ्राडो की जांचकर सच्चाई सामने लाना जिला प्रशासन का दायित्व है। कहे कि ताकत का उपयोग ऐसा होना चाहिए कि जनता भय मुक्त होकर चुनाव करें। चाहे वो कोई भी चुनाव हो। कहे कि राजनैतिक दलों का नैतिक पतन हो चुका है। कटाक्ष करते हुए कहे कि दल नए नए कार्यकर्ता बनाते है। उनके दिमाग में राष्ट्रवाद का जहर घोलते है। उन्हें बड़े बड़े सपने दिखाते है। जहां कार्यकर्ता नहीं होते वहां जाकर धर्म का सहारा लेते है। ये सभी अच्छाई राजनीतिक दलों में भरी है और ये अपना असली चेहरा पंचायत चुनाव में सामने लेकर आए है।


रिपोर्ट :- संतोष द्विवेदी

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