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कहने को तो नगर पंचायत, लेकिन सुविधाएं गांव से भी बदतर



रतसर (बलिया) कहने को नगर पंचायत का दर्जा है लेकिन सुविधाएं गांवों से भी बदतर है। कहीं जल निकासी के लिए बनी नालियां ध्वस्त है तो कहीं सड़क ही जर्जर हालात में है। आज भी लोग आने जाने के लिए गड्ढायुक्त सड़कों का सहारा लेने के लिए मजबूर है। हेड से टेल तक कहीं भी मुक्कमल जल निकासी की व्यवस्था नहीं है। नगर वासियों ने कई बार इस दुर्व्यवस्था को लेकर शिकायत की मगर कोई सुनवाई नही हुई। नगर पंचायत का ही एक मोहल्ला रतसर खुर्द की आबादी लगभग ढाई हजार के करीब है। यहां न तो जल निकासी की व्यवस्था है और न ही सफाई कर्मियों द्वारा सफाई की। बरसात के मौसम में पूरा सड़क पानी से भर जाता है। चारो तरफ कीचड़ पसरा है। रास्ते से गुजरने वाले कीचड़ में सन जाते है। बरसात के मौसम में पूरा मुहल्ला पानी से भर जाता है। लोगों के घरों और दरवाजे तक जलजमाव की स्थिति बनी हुई है। लोगों का घर से निकलना दुभर हो गया है। नगर प्रशासन की उपेक्ष लोगों को भारी पड़ने लगा है जिसको लेकर लोगों में काफी आक्रोश है। बैजूपुर निवासी पं० भरत पाण्डेय का कहना है कि मुख्य सड़क से घर तक जाने के लिए सौ मीटर के करीब पेबर्स ब्लाक से निर्मित रास्ता शुरूआती मौसम से ही पानी से भरा है। कहीं आना-जाना मुश्किल हो गया है। नगर प्रशासन को समस्या से कई बार अवगत कराया गया है लेकिन कोई माकूल कार्यवायी न होने से लोगों में धीरे-धीरे आक्रोश बढता जा रहा है। कस्बा वासियों ने नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी से तत्काल जल निकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है।


रिपोर्ट : धनेश पाण्डेय

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