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संस्कार ,संस्कृति ,नैतिकता मानव की सबसे बड़ी सम्पति:-जीयर स्वामी जी


 


दुबहर:-धर्म और कर्म के साथ जीवन में शर्म का भी होना अति आवश्यक है। वर्तमान परिवेश में हमारे संस्कार ,संस्कृति और नैतिकता भटकाव के रास्ते पर है।  हम अपनी संस्कृति ,सभ्यता से विमुख होकर कार्य करते हैं उसका फल हमें कभी प्राप्त नहीं होता है।उक्त बातें  भारत के महान मनीषी संत त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के कृपा पात्र परम शिष्य लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज ने महर्षि भृगु की धरती पर जनेश्वर मिश्रा सेतु एप्रोच मार्ग के निकट हो रहे चातुर्मास व्रत में शुक्रवार की देर शाम प्रवचन के दौरान कहि।  उन्होंने कहा कि संस्कार ,संस्कृति ,नैतिकता मानव की सबसे बड़ी संपत्ति है।  इसके अभाव में मनुष्य के पास सब कुछ होने के बाद भी कुछ भी नहीं है। जो अपने संस्कार ,संस्कृति से भटक जाता है वह जीवन में कभी संयमित नही रह पाता है।बतलाया कि परमात्मा के स्वरूप मे ही सत्य का वास होता है। जो भगवान की भक्ति में लीन रहते हैं उनकी रक्षा सदैव भगवान करते हैं। वेद के अनुसार जिनके द्वारा जन्म ,पालन संघार होता है वही भगवान होते हैं। उन्होंने बतलाया कि चार लाख बत्तीस हजार वर्ष कलयुग की आयु है।अभी कलयुग 6 हजार वर्ष पूर्ण हुआ है। जो प्रकृति के सृजनकर्ता है  वही नारायण है। साम ,दाम, दण्ड ,भेद शासकीय व्यवस्था के लिए नितान्त आवश्यक हैं। सृष्टि के प्रारंभ में भगवान ने जल को प्रकट किया और उसे ही अपना निवास बना लिया इसलिए उनका नाम नारायण पड़ा। उन्होंने कहा कि भगवान की अहरागनी शक्ति से महालक्ष्मी जी प्रकट हुई लक्ष्मी जी के आग्रह पर भगवान ने सृष्टि की रचना की।  भगवान के नाभि से कमल और कमल से ब्रह्मा  जी प्रकट हुए।भगवान के अनन्त अवतार है जिसमे  आदि देवनारायण का अवतार भगवान का प्रथम अवतार हैं।सनक, सनातन ,सनन्दन ,सनत कुमार ये भगवान के दूसरे अवतार हुए। वराहा अवतार ,नारद अवतार क्रमशः तीसरे और चौथे अवतार हैं।

रिपोर्ट:-नितेश पाठक

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