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जानें आज दिनांक 24 अगस्त 2025 का पंचांग




 *🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞*

*⛅दिनांक - 24 अगस्त 2025*


*⛅दिन - रविवार*

*⛅विक्रम संवत् - 2082*

*⛅अयन - दक्षिणायण*

*⛅ऋतु - शरद*

*⛅मास - भाद्रपद*

*⛅पक्ष - शुक्ल*

*⛅तिथि - प्रतिपदा सुबह 11:48 तक तत्पश्चात् द्वितीया*

*⛅नक्षत्र - पूर्वाफाल्गुनी रात्रि 02:05 अगस्त 25 तक तत्पश्चात् उत्तराफाल्गुनी*

*⛅योग - शिव दोपहर 12:30 तक तत्पश्चात् सिद्ध*

*⛅राहुकाल - शाम 05:29 से शाम 07:04 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार)* 

*⛅सूर्योदय - 06:19*

*⛅सूर्यास्त - 07:04 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त अहमदाबाद मानक समयानुसार)*

*⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में*

*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:49 से प्रातः 05:34 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार)*

*⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:16 से दोपहर 01:07*

*⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:19 अगस्त 25 से रात्रि 01:04 अगस्त 25 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार)*

*⛅️व्रत पर्व विवरण - त्रिपुष्कर योग, सर्वार्थसिद्धि योग (रात्रि 02:05 अगस्त 25 से प्रातः 06:20 अगस्त 25 तक)*

*⛅️विशेष - प्रतिपदा को कूष्मांड (कुम्हड़ा, पेठा) न खाएं, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है व द्वितीया को बृहति (छोटा बैंगन या कटहरी) खाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*


*🔹 ब्रह्मचर्य रक्षा के उपाय 🔹*


*ब्रह्मचर्य-पालन का दृढ़ शुभसंकल्प, पवित्र, सादा रहन-सहन, सात्त्विक, ताजा अल्पाहार, शुद्ध वायु-सेवन, सूर्यस्नान, व्रत-उपवास, योगासन, प्राणायाम, ॐकार का दीर्घ उच्चारण, ‘ॐ अर्यामायै नमः’ मंत्र का पावन जप, शास्त्राध्ययन, सतत श्रेष्ठ कार्यों में रत रहना, सयंमी व सदाचारी व्यक्तियों का संग, रात को जल्दी सोकर ब्राह्ममुहूर्त में उठना, प्रातः शीतल जल से स्नान, प्रातः-सांय शीतल जल से जननेन्द्रिय-स्नान, कौपीन धारण, निर्व्यसनता, कुदृश्य-कुश्रवण-कुसंगति का त्याग, पुरुषों के लिए परस्त्री के प्रति मातृभाव, स्त्रियों के लिए परपुरुष के प्रति पितृ या भ्रातृ भाव – इन उपायों से ब्रह्मचर्य की रक्षा होती है ।* 


*🔸 स्त्रियों के लिए परपुरुष के साथ एकांत में बैठना, गुप्त वार्तालाप करना, स्वच्छंदता से घूमना, भड़कीले वस्त्र पहनना, कामोद्दीपक श्रृंगार करके घूमना – ये ब्रह्मचर्य पालन में बाधक हैं । जितना धर्ममय, परोपकार-परायण व साधनामय जीवन, उतनी ही देहासक्ति क्षीण होने से ब्रह्मचर्य का पालन सहज-स्वाभाविक रूप से हो जाता है । नैष्ठिक ब्रह्मचर्य आत्मानुभूति में परम आवश्यक है ।*


*🔹 रविवार विशेष🔹*


*🔸 रविवार के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*


*🔸 रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90)*


*🔸 रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75)*


*🔸 रविवार सूर्यदेव का दिन है, इस दिन क्षौर (बाल काटना व दाढ़ी बनवाना) कराने से धन, बुद्धि और धर्म की क्षति होती है ।*


*🔸 रविवार को आँवले का सेवन नहीं करना चाहिए ।*


*🔸स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए । इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं ।*


*🔸रविवार के दिन पीपल के पेड़ को स्पर्श करना निषेध है ।*


*🔸 रविवार के दिन तुलसी पत्ता तोड़ना वर्जित है ।*



डेस्क

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