हाईकोर्ट ने 49 लाख के चेक बाउंस मामले में राहत बरकरार रखी
बलिया। चेक बाउंस के एक मामले में 11 वर्ष तक चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मनियर कस्बा निवासी रूपेश कुमार सिंह उर्फ पिंटू सिंह को बड़ी राहत मिली है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपील क्रिमिनल रिवीजन संख्या 3684/2019 को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है।हाईकोर्ट में वादी पक्ष के अधिवक्ता अवध बिहारी सिंह ने बताया कि पिंटू सिंह और प्रोपराइटर फूड प्रोडक्ट्स के मालिक रंजीत जायसवाल के बीच पारिवारिक संबंध थे। कारोबार के सिलसिले में समय-समय पर पिंटू सिंह ने कुल 49 लाख रुपये दिए थे। जब धन वापसी का समय आया तो 20 अगस्त 2015 को रंजीत जायसवाल ने 49 लाख रुपये का चेक दिया, जो भारतीय स्टेट बैंक की मनियर शाखा में अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया।
इसके बाद पिंटू सिंह ने आरोपी के खिलाफ निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट 1881 की धारा 138 के तहत एसीजेएम प्रथम, बलिया की अदालत में वाद दायर किया। सुनवाई के बाद तत्कालीन अपर सीजेएम रमेश कुशवाह ने 4 फरवरी 2019 को आरोपी को दोषी करार देते हुए डेढ़ वर्ष के साधारण कारावास और 60 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
आरोपी की ओर से सत्र न्यायालय में दाखिल अपील को भी 19 सितंबर 2019 को खारिज कर दिया गया। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायालय ने रिवीजन याचिका को निरस्त करते हुए निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया।अधिवक्ता अवध बिहारी सिंह के अनुसार, “हाईकोर्ट का यह फैसला स्पष्ट करता है कि चेक बाउंस जैसे मामलों में कानून सख्ती से लागू होता है और पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए न्यायालय प्रतिबद्ध है।न्याय मिलने पर पिंटू सिंह ने कहा कि लंबी कानूनी प्रक्रिया के बावजूद उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। उन्होंने कहा, सत्य की जीत हुई है और मुझे न्यायालय पर गर्व है।
इस फैसले को क्षेत्र में कानूनी व्यवस्था पर विश्वास मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
डेस्क








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