श्रीमद्भगवद्गीता ज्ञान यज्ञ कथा: सच्चा मित्र वही होता है जो विपरीत परिस्थितियों में भी साथ न छोड़े :बालक दास
गड़वार(बलिया) क्षेत्र के करमपुर गांव में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के आठवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। यज्ञ मंडप में पं.गणेश शास्त्री के नेतृत्व में विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन-अर्चन और परिक्रमा का आयोजन किया जा रहा है। शाम को कथावाचक बालक दास जी महाराज ने कथा में श्रीकृष्ण-सुदामा मित्रता का वर्णन किया। बालक दास जी महाराज ने बताया कि मित्रता कैसे निभाई जाए यह भगवान श्रीकृष्ण सुदामा से समझा जा सकता है। सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र से मिलने के लिए द्वारिका पहुंचे। द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा और महल की ओर बढ़ने लगे। द्वार पर द्वार पालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। तब उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं। इस पर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है। अपना नाम सुदामा बता रहा है। जैसे ही द्वारपाल के मुंह से उन्होंने सुदामा नाम सुना,प्रभु सुदामा- सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे। वहीं सामने सुदामा सखा को देखकर अपने सीने से लगा लिया। सुदामा ने भी कन्हैया-कन्हैया कहकर उन्हें गले लगाया और सुदामा को अपने महल में ले गए और उनका अभिनंदन किया। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि सच्चा मित्र वही होता है जो विपरीत परिस्थितियों में भी साथ न छोड़े और मित्र के सम्मान की रक्षा करे। कृष्ण-सुदामा की मित्रता आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। इस दृश्य को देखकर श्रोता भाव विभोर हो गए। उन्होंने सुदामा और कृष्ण की झांकी पर फूलों की वर्षा की। यज्ञाधीश अनामानंद महाराज ने बताया कि कथा के अंतिम दिन भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
रिपोर्ट : डी.पाण्डेय


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